शायरी

 "कभी ये सोच कर दुखी मत होना, कि

कब ये जमाना मेरे हुनर को समझ पाएगा,

क्योंकि, अगर हिरे की पहचान हर कोई करने लगा

तो उसका मोल कम नहीं हो जाएगा?"😊☺️

                                     -अंकिता घुगे.


     

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मन काय असतं?

खरे दैवत- "आई"

शहर आणि गाव