शायरी

 "इतनी सस्ती तो नहीं मेरी हॅंसी,

कि, किसी के कुछ कहने पर मैं हॅंसना ही छोड़ दूॅं,

और इतनी कमजोर भी नहीं मैं,

कि, एक बार हार जाऊॅं, तो कोशिश करना ही छोड़ दूॅं|"

                                -अंकिता घुगे.


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