शायरी

 लड़कीयाॅं जन्म भी पराये घर में लेती है,

और किसी को जन्म भी पराये घर में ही देती हैं,

इनका अपना कोई घर नहीं होता;

शायद इसीलिए तो, जो जिंदगी ये जीती है

उस जिंदगी पर तो खुद इनका भी हक नहीं होता|

                                      -अंकिता घुगे.


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मन काय असतं?

खरे दैवत- "आई"

शहर आणि गाव