शायरी
"हमारा दर्द और कोई नहीं समज सकता
हम जो महसूस करते हैं, वो और कोई नहीं कर सकता,
क्योंकि, खुद से ज्यादा खुद को और कोई नहीं समज सकता
इसीलिए कहती हूॅं, कि छोड़ दो दुसरों से सहारे की उम्मीद करना
क्योंकि, इन उम्मीदों से कुछ हासिल नहीं होता!!"
"हमारा दर्द और कोई नहीं समज सकता
हम जो महसूस करते हैं, वो और कोई नहीं कर सकता,
क्योंकि, खुद से ज्यादा खुद को और कोई नहीं समज सकता
इसीलिए कहती हूॅं, कि छोड़ दो दुसरों से सहारे की उम्मीद करना
क्योंकि, इन उम्मीदों से कुछ हासिल नहीं होता!!"
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