दिल में छिपे अल्फाज़...✍️

 कुछ लिखे हैं कलम से कागज़ पर

तो कुछ दफन है अभी भी दिल के अंदर,

तुम पुछो तो सही, कि क्या है तुम्हारे दिल में

हम भी झट़ से दिल की बात ले आएंगे ज़ुबा पर


कोई पुछता नहीं हमसे दिल का हाल

इसलिए अक्सर हम चुप रह जाते हैं,

लेकिन मिले कभी मौका, तो कोरे कागज़ पर

हम दिल की हर बात कह जाते हैं


दिल में छिपे अल्फाज़ शब्दों में लिखने की

ऐसी आदत लगी हैं हमें, कि क्या बताए,

बडी़ बैचेनी सी होती है तब

जब कुछ न लिखा जाए


अल्फाजो़ं का समंदर बडा़ ही गहरा है मुझमें

ड़र लगता है, कही खुद ही न डूब जा़ऊॅं,

इसलिए दूर रहती हूॅं थोडा़ लोगों से

कही खुद के साथ उन्हें भी डूबा न ले जाऊॅं


ऐसी बहोत सी बातें हैं दिल में

मगर किसी से कहने की हिम्मत नहीं होती,

लेकिन जब से कागज़ और कलम साथी बने हैं

दिल की बात किसी से कहने की चाहत नहीं होती


माना अलग हूॅं थोडी़ दुनिया से

लेकिन फिर भी खुद पर नाज़ करती हूॅं,

युॅं तो हजारों दोस्त हैं मेरे पास भी

पर दिल में छिपे अल्फाज़ कागज़ पर ही लिखती हूॅं


                                     -अंकिता घुगे.







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