शायरी

 "किसी के बारे में सोचने तक ही हमें फुरसत नहीं

किसी से सहारे की भी हमें चाहत नहीं,

हमारी जिंदगी हम अपने हिसाब से जीते है

किसी की उम्मीदों पर जीने की हमें आदत नहीं|"


                                   -अंकिता घुगे.


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