शायरी

 "मैं वो चाॅंद नहीं बनना चाहती

जिसे हर कोई निहारे,

मैं तो उस सुरज सा चमकना चाहती हूॅं

जिसे ऑंख उठाकर देखने की कोई हिम्मत ही न करें|"

                                      -अंकिता घुगे.

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