शायरी
"सावन की बुॅंदों ने की, हमें भिगाने की है एक नई साजिश,
मैंने भी बचने का न कोई उपाय निकाला, न की है कोई कोशिश,
मानो जैसे, पुरी हो गई हर तमन्ना और पुरी हो गई इस दिल की हर ख्वाहिश,
कुछ ऐसी गिरी है आज हम पर, ये सावन की पहली बारिश|"
-अंकिता घुगे.
"सावन की बुॅंदों ने की, हमें भिगाने की है एक नई साजिश,
मैंने भी बचने का न कोई उपाय निकाला, न की है कोई कोशिश,
मानो जैसे, पुरी हो गई हर तमन्ना और पुरी हो गई इस दिल की हर ख्वाहिश,
कुछ ऐसी गिरी है आज हम पर, ये सावन की पहली बारिश|"
-अंकिता घुगे.
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